माउस क्या है- इतिहास और प्रकार

माउस क्या है? हम लोगों को किसी भी कार्य को करने के लिए भगवान् ने हाथ और पैर दिए है. बिना हाथ के आप कुछ इधर से उधर नहीं कर सकते है. ठीक उसी तरह कंप्यूटर  के लिए माउस है. माउस कंप्यूटर का एक जरुरी भाग है. बिना माउस के आप कंप्यूटर में न फाइल को इधर से उधर कर सकते और न ही आप स्क्रीन के अन्य भागो में जा सकते है.

माउस के बगैर कंप्यूटर चलाना काफी मुस्किल काम है, माउस की वजह से आपका काम काफी आसानी से हो जाता है. आज इस लेख में हम माउस क्या है कैसे काम करता है विषय पर बात करेंगे. इसमें हम आपको माउस के प्रकार , माउस के फायदे आदि बताएँगे .

तो चलिए दोस्तों शुरू से शुरू करते है!!!

माउस क्या होता है |

हम सभी जानते है की कंप्यूटर में दो तरह के डिवाइस होते है: इन्पुट डिवाइस और आउटपुट डिवाइस. माउस एक इनपुट डिवाइस होता है और इसको टेक्निकल भाषा में पोइंटिंग डिवाइस भी कहते है.

माउस का मुख्य काम है कंप्यूटर को इनपुट देना और ये यूजर को कंप्यूटर के स्क्रीन पर इधर से उधर जाने में मदद करता है. इसका काम कंप्यूटर स्क्रीन पर दिख रहे item को सेलेक्ट करना होता है. यूजर माउस के जरिये ही कंप्यूटर को निर्देश देता है.

कंप्यूटर स्क्रीन पर किसी भी तरह का फंक्शन करने के लिए माउस अवश्यक होता है.

माउस की खोज और इसका इतिहास |

सन १९६०  के दौर में कंप्यूटर को इनपुट पंच कार्ड के द्वारा दिया जाता था. फिर उसी समय 1960 में एंजेलबर्ट ने माउस का अविष्कार किया. लेकिन सबसे पहला माउस १९६३ में बिल इंग्लिश ने बनाया था जो जो लकड़ी का बना हुआ था.

इस माउस को चलाने के लिए दो पहियों का उपयोग किया जाता था. इस माउस का पहला डिमॉन्सट्रेशन डगलस ने 1968 में सैन फ्रांसिसको में आयोजित कंप्यूटर कॉन्फ्रेंस में दिया था.

इस माउस से दो लोग जैक हांली और बिल इंग्लिश सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, उन्हों ने इसी आधार पर १९७२ में पहला डिजिटल माउस जीरॉक्स पार्क का अविष्कार किया था. इस माउस की सबसे ख़ास बात ये थी की ये इनफार्मेशन डायरेक्ट कंप्यूटर को भेजता था, क्योकि इस माउस को एनालॉग से डिजिटल में कन्वर्ट करने की जरुरत नहीं होती थी.इसमें सबसे पहले मेटल की बाल लगे थे.


डगलस एंजेलबर्ट ने १९७० में माउस को पेटंट आपने नाम करवाया था, सबसे खास बात उनके नाम ४५ अन्य अविष्कार भी पेटेंट है.
माउस का सफ़र काफी रोमांचक रहा है, इसको सबसे पहले बग के नाम से बुलाया जाता था लेकिन बाद में इसको माउस नाम दे दिया गया. माउस नाम इसको इसीलिए दिया गया क्योकि जो माउस स्टैंफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट में बना था वो बिलकुल चूहे जैसा था.


लेकिन बाज़ार में माउस अविष्कार के करीब २० साल बाद आया. सबसे पहला डिजिटल माउस जेरोक्स स्टार 8010 लोगो के बीच १९८० में लाया गया था. ये माउस पर्सनल कंप्यूटर के साथ मुफ्त मिलता था. इसके साथ ही माइक्रोसॉफ्ट ने भी १९८३ से माउस को बाज़ार में ला दिया था.

दुनिया का सबसे पहला वायरलेस माउस १९९१ में लॉजिटेक ने लांच किया था जो रेडियो फ्रीक्वेंसी ट्रांसमिशन पर काम करता था और साथ में लॉजिटेक ने ही २००४ मे पहला लेज़र माउस बाज़ार में लांच किया था, लेज़र माउस की स्पीड ऑप्टिकल माउस के मुकाबले २०% ज्यादा होता है.

माउस के प्रकार | 

आज बाजार मे की प्रकार के माउस उपलब्ध हो चुके है। आप अपने काम के हिसाब से कोई भी माउस ले सकते है। चलिए आज आपको माउस के 6  प्रकार के बारे मे बताते है ।

माउस के निम्न प्रकार:

  1. व्ययर्ड माउस
  2. वायरलेस माउस ]
  3. मकैनिकल माउस
  4. ऑप्टिकल माउस
  5. लेसर माउस
  6. गेमिंग माउस
  • व्ययर्ड माउस 

ये माउस आम तौर पर हर जगह इस्तेमाल होता है। इसमे तार लगे होते है। इसकी सबसे अच्छी बात ये है कि इसमे आपको बैटरी की जरूरत नहीं होती है। आज कुछ लोगों का मानना है कि वायर वाले माउस बेकार हो चुके है और पुराने। लेकिन ऐसा नहीं है, व्ययर्ड माउस आज भी वायरलेस माउस से अच्छे है।इनकी स्पीड वायरलेस माउस के मुकाबले मे तेज होती है।

  • वायरलेस माउस

इस माउस को कॉर्डलेस  माउस भी कहाँ जाता है। इन माउस मे तार कि जगह बैटरी का उपयोग होता है। इनमे आपको तारों कि उलझन से छुटकारा मिल जाता है। वायरलेस माउस रेडियो फ्रीक्वन्सी पर काम करते है। ये माउस और भी अन्य तरीके से काम करते है जैसे:   2.4 Ghz वायरलेस स्टैन्डर्ड पर और किसी किसी माउस मे dongle का भी इस्तेमाल होता है।

ये माउस कही ले जाने मे आरामदायक होते है। लेकिन इनकी बैटरी कब खत्म हो जाए कुछ कह नहीं सकते है, और ये तार वाले माउस के मुकाबले थोड़ा धीमा होता है।

  • मकैनिकल माउस

कंप्यूटर के इतिहास मे सबसे प्रसिद्ध माउस रहा है। पुराने समय मे सबसे ज्यादा इसी माउस का इस्तेमाल होता था। इस माउस को बाल माउस के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसमे एलईडी कि जगह पर सेंटर मे एक बाल होती थी, जो आपके हाथ के मोशन कि डिटेक्ट कररबर के काम करता था।

  • ऑप्टिकल माउस

आज के समय मे ये सबसे पोपुलर माउस है, इसमे  रबर के बाल और मकैनिकल सेन्सर कि जगह पर एलईडी लाइट होती है। ये एलईडी लाइट मोशन को डिटेक्ट करने का काम करता है।

लेकिन इस माउस कि कमी ये है कि हर जगह ये काम नहीं करता है, जैसे प्लास्टिक, और ग्लास आदि क्योंकि इन जगहों पर एलईडी लाइट सही से रिफ्लेक्ट नहीं हो पता है।

  • लेसर माउस

लेसर माउस भी एक ऑप्टिकल माउस का ही प्रकार है। ये माउस भी ठीक उसी प्रिन्सपल पर काम करता है जिस पर ऑप्टिकल माउस काम करता है लेकिन इसमे एलईडी कि जगह पर लेसर लाइट होती है। लेसर लाइट होने कि वजह से ये ऑप्टिकल माउस के मुकाबले 20 गुण ज्यादा तेजी से काम करता है।

लेसर माउस कि सबसे बड़ी कमी ये है कि ये एलईडी ऑप्टिकल माउस के मुकबाले उतना ऐक्यरिट नहीं होता है। लेसर माउस का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये माउस हर surface पर काम करता है।

  • गेमिंग माउस

गेमिंग माउस भी सभी आम माउस की तरह ही होता है लेकिन इसमे आपको 3 बटन कि जगह 6 बटन या उससे ज्यादा बटन मिलते है। इसकी सबसे बड़ी खशियत है कि आप इस माउस कि dpi(dots per inch) अपने हिसाब से बढ़ा सकते है।

गेमिंग माउस आम माउस के मुकाबले ज्यादा accurate होता है। लेकिन गेमिंग माउस साइज़ मे थोड़ा बड़े होते है अगर आपका हाथ छोटा है तो आप इसको न ले।

 

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