ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है- प्रकार, कार्य, और फायदे

आप मे से कई सारे लोग जानते होंगे की ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है। लेकिन कई सारे लोग आज भी नहीं जानते है। कोई बात नहीं आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे की ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है, कैसे काम करता है और इसके फायदे।

एक उदाहरण के माध्यम से समझ लीजिए, जैसे आपके शरीर मे आत्मा होती है जो आपके शरीर के भागों को नियंत्रित करती है ठीक उसी तरह से ऑपरेटिंग सिस्टम है ये भी कंप्युटर के हार्डवेयर और यूजर को जोड़ने का काम करती है।

ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल आज हर उपकरण मे हो रहा है जैसे: मोबाईल मे, लैपटॉप मे,फ्रीज़ मे, और वाशिंग मशीन आदि। ऑपरेटिंग सिस्टम की वजह से काम आसान होगया है, वरना आज कई सारे लोगों को तो कंप्युटर चालान भी नहीं आता।

जब आप मोबाईल या कंप्युटर खरीदते है तो अक्सर पूँछा जाता है की कौन सा ऑपरेटिंग सिस्टम चाइए। तो आप एंड्रॉयड, विंडोज़, dos , या मैक आदि बोलते है।
अगर आपको ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे मे ज्यादा जानकारी नहीं है तो आज हम आपको इसके बारे मे पूरी जानकारी देंगे ताकि आप किसी को बात सके की कौन सा ऑपरेटिंग सिस्टम उनके लिए बेहतर है।

तो चलिए शुरू करते है!

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है | What is an operating system in hindi?

ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है। आपको पता होगा की सॉफ्टवेयर 2 तरह के होते है उनमे ही एक सिस्टम सॉफ्टवेयर होता है। ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्युटर हार्डवेयर और यूजर के बीच एक इंटरफेस प्रदान करता है जिसकी वजह से वो एक दूसरे को समझ पाते है।ऑपरेटिंग सिस्टम अन्य प्रोग्राम को चलने के लिए एक प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।

आप सभी जानते होंगे की एक कंप्युटर सिस्टम 4 भागों मे बटा होता है:

  • कंप्युटर हार्डवेयर
  • ऑपरेटिंग सिस्टम
  • ऐप्लकैशन सॉफ्टवेयर
  • यूजर

अभी हम ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे मे बात कर रहे है बाकी भागों के बारे मे हम आपको बाद मे बातयएंगे। ऑपरेटिंग सिस्टम हार्डवेयर को नियंत्रित करने का काम करता है ताकि यूजर को कोई परेसानी न हो।

ऑपरेटिंग सिस्टम के 2 मुख्य उदेश्य होते है:

  • Convenience: ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्युटर को सरल और समझने लायक बना देता है।
  • Efficiency: ऑपरेटिंग सिस्टम आपको कंप्युटर के रिसोर्सेज को सही तरीके से इस्तेमाल करने मे मदद करता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम बिल्कुल एक सरकार की तरह होता है। जैसे सरकार कोई काम खुद नहीं करती उसी तरह ऑपरेटिंग सिस्टम है ये बस आदेश देता है और देखता है सभी प्रोग्राम सही से अपना काम करे।

ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्युटर के सभी रिसोर्सेज को मैनेज करता है है इसीलिए इसको रिसोर्स मैनेजर भी कहा जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम अपनी प्रोग्रामिंग की जानकारी किसी से साझा नहीं करता है। ये आपको हार्डवेयर कॉमपोनेन्टस और उससे जुड़ी कोई भी जानकारी नहीं देता है। आप जिस कंप्युटर मोडेल को आज आसानी से चलाते है उसको वर्चुअल मशीन कहते है।

अभी तक सबसे ज्यादा लोगों के द्वारा जो ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल होता है वो विंडोज़ है।

ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर का कंट्रोल कैसे लेता है

जब हम सब अपने कंप्युटर सिस्टम को ऑन करते है तो कंप्युटर कुछ लाजिकल स्टेप्स को करता है और ऑपरेटिंग सिस्टम को कंप्युटर का कंट्रोल दे देता है।
बूटिंग प्रॉसेस जब शुरू होता है उसी के साथ कंप्युटर एक पावर ऑन सेलफ टेस्ट भी करता है जिसको post कहते है।

इस स्टेप मे कंप्युटर खुद के बेसिक डिवाइस को चेक करता है जो प्रोसेसर से कनेक्ट होते है। जैसे माउस, कीबोर्ड, प्रिंटर, आदि। इस प्रक्रिया को करने के लिए कंप्युटर इन डिवाइसेस को एक को एक प्री डिफाइन्ड सिग्नल भेजता है और वो कंप्युटर उम्मीद को अगर वही सिग्नल वापस मिल जाता है तो मतलब सभी कुछ ठीक है।

इसके बाद काम आता है bios(बेसिक इनपुट आउट्पुट सिस्टम) का ये कंप्युटर के रोम का ही पार्ट होता है जिसका काम मेमोरी को चेक करना होता है।
Bios डिस्क सेक्टर को रीड करता है और ऑपरेटिंग सिस्टम को चालू करने वाले files को सिलेक्ट करता है। डिस्क मे जिस जगह पर ये फाइल होती है उसको बूट सेक्टर कहते है। अगर ये फाइल लोड नहीं होंगी तो आपका कंप्युटर स्टार्ट नहीं होगा।

जब ये सभी फाइल लोड हो जाती है तब इसके बाद कुछ और फाइल की जरूरत होती है जो कंप्युटर को ये बताता है की क्या करना है क्या नहीं। बूटिंग प्रॉसेस की प्रक्रिया जब हो जाती है उसके बाद ऑपरेटिंग सिस्टम कंट्रोल कंप्युटर का कंट्रोल ले लेता है।

क्या कंप्यूटर के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम जरूरी है

कई सारे लोगों का ये सवाल होता है की क्या बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कंप्युटर चल सकता है, तो हा कंप्युटर को चलाने लिए ऑपरेटिंग सिस्टम की कोई जरूरत नहीं है इसके बिना भी चल सकता है। आज भी कई ऐसे कंप्युटर है जिनको किसी खास काम के लिए बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के चलाया जाता है।

कंप्युटर के पास कई तरह के प्रोग्राम रन करने की क्षमता होती है। अगर हम ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करते है तब उस ऐप्लकैशन को कंप्युटर काम करने के लिए खुद से एक ऑपरेटिंग सिस्टम सर्विस को प्रोग्राम करना पड़ सकता है।ऑपरेटिंग सिस्टम इन सभी दिकतों से छुटकारा दिला देता है ये सभी reusable सर्विस की एक लाइब्रेरी बना डेटा है ।

ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य

ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्युटर के चार जरूरी रिसोर्सेज को मैनेज करता है जैसे: मेमोरी, प्रोसेसर, इनपुट/आउट्पुट डिवाइस और फाइल। इसीलिए ऑपरेटिंग सिस्टम 4 जरूरी ऑपरेशन को करता है।

  • Memory management Function: ये मेमोरी मे खाली जगह को खोजता है और किसी अन्य प्रॉसेस को इस खाली जगह को allocate कर देता है।
  • Processor management function: ये प्रोसेसर को किसी किसी अन्य process को execute की पर्मिशन देता है।
  • I/o device management function: ए सभी डिवाइसेस को एक प्रॉसेस allocate करता है।
  • File management function: ये सभी फाइल की जानकारी रखता है की कौन सी फाइल कब खुली और कब बंद हुई।

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार – Types of Operating System in Hindi

ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर के शुरुआत से ही साथ रहे है, आज कई प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम आते है। तो चलिए जानते है ऑपरेटिंग सिस्टम के विभिन्न प्रकार 

1. Multi-user Operating System

इसके नाम से ही पता चलता है कि इस ऑपरेटिंग सिस्टम पर एक साथ कई सारे यूजर एक साथ काम कर सकते है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम पर एक समय मे 100 से भी ज्यादा लोग एक साथ काम कर सकते है

\Single-user Operating System

इस ऑपरेटिंग सिस्टम मे एक साथ सिर्फ एक ही यूजर काम कर सकता है । इसपे कई सारे यूजर एक साथ काम नहीं कर सकते है। 

3. Multitasking Operating System

इस ऑपरेटिंग सिस्टम मे सबसे बड़ी बात ये है की इसपे आप एक समय मे कई सारे काम कर सकते है। 

इसपे आप एक समय मे गेम और गाना दोनों चला सकते है। 

4. Multi Processing Operating System

इस ऑपरेटिंग सिस्टम मे एक से अधिक प्रोसेसर प्रोसेसिंग करते है। जिसका मतलब है इसमे एक प्रोग्राम को एक से अधिक cpu से चलेगा। .

5. Real Time Operating System

यह ऑपरेटिंग सिस्टम रियल टाइम है जिसका  मतलब है कि ये तुरंत किसी भी इनपुट का जवाब देता है। जैसे आपका विंडोज़ है।

 

ऑपरेटिंग सिस्टम के फायदे  | Benfefits of operating system in hindi

  • ऑपरेटिंग सिस्टम मे आपको मेनू, आइकन और बटन के रूप में ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (जीयूआई) मिलता है जिससे आपका काम आसान हो जाता है।
  • अपने मेमोरी मानजमेंट सिस्टम के जरिए कंप्यूटर कि मेमोरी को मैनेज करता है।
  • कंप्यूटर से जुड़े सभी इनपुट और आउटपुट डिवाइस को कंट्रोल करता है।
  •  प्रोसेस को सिंक्रनाइज़ करता है। ये मॉनिटर्स और सेमाफोर का उपयोग आमतौर पर प्रोसेस को सिंक्रनाइज़ करने के लिए करता है।
  • आपके कंप्यूटर मे आने वाले किसी भी प्रॉब्लेम को ये सुधारता है और देखता है कि कोई दिक्कत न हो।

 

 

 

 

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